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‘पत्र वायरल’ होने के बाद काग्रेस में घमासान, पूर्व यूपी कांग्रेस अध्यक्ष निर्मल खत्री ने भी जारी किया खुला पत्र

अयोध्या: काग्रेस पार्टी में पत्र वायरल होने के बाद कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री ने भी खुला पत्र जारी किया है। जिसमें उन्होने लिखा है कि वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं द्वारा जारी वह पत्र जिसकी मीडिया में आज बहुत चर्चा है के संदर्भ में सबसे पहली बात मैं यह कहना चाहूँगा कि वह पत्र जो अखबारों में छपा उसे इन्ही नेताओं में से किसी ने लीक कर छपवाया अत: चूकि यह प्रकरण इन नेताओं द्वारा ही सार्वजनिक किया गया है व इसका खंडन भी किसी ने नही किया है अत: मैं भी अपनी राय सार्वजनिक तौर पर रखने के लिए स्वतंत्र हूँ।

1. यह अच्छी बात है कि अ.भा.का. कमेटी का अध्यक्ष पूर्वकालिक होना चाहिए। लेकिन मेरी राय में गांधी परिवार के अतिरिक्त किसी भी नेता में पूरे देश के कार्यकर्ताओं और जनता को अपने साथ जोडऩे की शक्ति नही है। साथ ही यही परिवार भाजपा सरकार के विरोध में संघर्ष कर भी रहा है और क्षमता भी रखता है। मैंने अन्य किसी भी नेता में इस क्षमता का पूर्वरूपेण अभाव देखा है उसका कारण चाहे जो भी रहा हो। अकेले माननीय राहुल गांधी ही मोदी सरकार के खिलाफ बोलते दिखाई देते हंै। मेरी राय में आदरणीया सोनिया गांधी जी यदि इस दायित्व को संभालती रहें तो उत्तम है लेकिन यदि स्वास्थ्य सम्बन्धी कारणों से यह सम्भव न हो तो माननीय राहुल गांधी जी को इस पद को संभालना चाहिए। यदि वे न चाहें तो भी कांग्रेस पार्टी के हित में उन्हें ही यह दायित्व सौपना चाहिए और माननीया प्रियंका गांधी को अ.भा.का. कमेटी का महासचिव(संगठन) बनाया जाना चाहिए।

2. इन नेताओं द्वारा संगठन में ब्लाक स्तर तक चुनाव कराने की बात की गई है। सिद्धान्त में तो यह जुमला काफी अच्छा है लेकिन व्यवहार में मैंने पिछले संगठनात्मक चुनाव के समय यह स्वयं देखा है कि जब केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण और उसके सर्वे सर्वा श्री मधुसूदन मिस्त्री जी नीचे तक चुनाव की प्रक्रिया कराने के लिए कटिबद्ध थे तब इनमे से अधिकांश नेता अपनी अपनी लिस्ट लेकर चुनाव प्राधिकरण पर बगैर चुनाव उसे घोषित करने के लिए दबाव बना रहे थे। श्री मिस्त्री जी अडिग थे और जैसा कि मुझे पता है माननीय राहुल जी भी निचले स्तर तक चुनाव चाहते थे, फिर भी इन लोगों के दबाव के चलते कांग्रेस नेतृत्व द्वारा यह अंतिम चरण के काम को करने की जिम्मेदारी संबंधित अ.भा.का.कमेटी के महासचिवों को दे दी गयी और उसका परिणाम यह रहा है कि चुनाव की जगह इन लोगों ने मनचाहा मनोनयन किया। अत: आज किस मुँह से यह नेता संगठन के ब्लाक स्तर के चुनाव की बात कर रहे हैं जबकि यही इस प्रणाली के विरोध में अतीत में दिखायी दिए हैं।

3. इन नेताओं द्वारा सी.डब्ल्यू.सी. के चुनाव कराने की बात भी की गयी है। जबकि इनमें से कुछ  सी.डब्ल्यू. सी. के सदस्य भी हैं। मैं इनसे पूछना चाहूँगा कि जब वर्ष 2019 के चुनाव में माननीय राहुल गांधी ने पार्टी की हार के बाद अपने ऊपर सम्पूर्ण जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था तो उस समय सी.डब्ल्यू.सी. के सदस्यों ने भी अपनी कुछ जिम्मेदारी समझते हुए इस्तीफा क्यों नहीं दिया।

4.आखिर क्या कारण है चुनावों के समय देश के सभी हिस्सों से कांग्रेस के प्रत्याशियों द्वारा सभा करने हेतु नेताओं को बुलाने की माँग सिर्फ गांधी परिवार के लिए ही होती है अन्य नेताओं की नगण्य सी। यह साबित करता है वह प्रत्याशी यह समझता है कि इस परिवार का कोई सदस्य ही उसके क्षेत्र में आकर जनता का समर्थन उसे दिला सकता है।

5. इन नेताओं ने राष्ट्रीय स्तर पर ‘लाइक माइंडेड’ राजनैतिक पार्टियों के साथ मेल जोल की बात भाजपा के मुकाबले के लिए की है। इस पर 2 सवाल उठते हंै कि आपकी क्षमता ,शक्ति क्या है इसको देखकर ही दूसरे दल आपको लिफ्ट देंगे। और दूसरी बात दूसरे दल की ताकत पर आप ऐश करने का जो फार्मूला चाहते हैं वह मेरी राय में कांग्रेस के लिए पहले भी घातक रहा है और भविष्य में भी रहेगा। मिसाल के तौर पर जिन जिन प्रदेशों में हमने स्थानीय दलों से तालमेल किया तो नतीजा यही निकला कि क्षेत्रीय दल मजबूत हुए और बीजेपी भी मजबूत हुई और हम कमजोर होते चले गये। यह तालमेल नही होना चाहिए। चुनावों में अपने दम पर लडऩा होगा। चुनाव के बाद आपकी इस राय पर विचार होना चाहिए न कि चुनाव के पहले।

6.अन्त में मेरी पत्र लिखने वाले सभी नेताओं से यह विनम्र अनुरोध है कि कांग्रेस को मजबूत करने के लिए इस समय यह अच्छा होगा कि सभी नेता दिल्ली छोड़कर अपने अपने गृह जनपदों (गृह प्रदेश नही) में जाकर कांग्रेस को बूथ स्तर तक मजबूत करने का काम करें।

जय कांग्रेस,जय गांधी परिवार
– निर्मल खत्री-
पूर्व अध्यक्ष उ.प्र.कांग्रेस कमेटी ,पूर्व संसद सदस्य फैज़ाबाद जनपद-अयोध्या(उ.प्र.)

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