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UNSC में भारत का कड़ा रुख, कहा- दाऊद इब्राहीम, लश्कर और जैश पर हो IS जैसी कार्रवाई

नई दिल्ली। चीन की मदद से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर मुद्दे को उठाने में जुटे पाकिस्तान को कोई सफलता तो नहीं मिली है, लेकिन भारत ने पाकिस्तान में फल-फूल रहे आतंकी संगठनों को जरूर एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया है। भारत ने विश्व बिरादरी से आग्रह किया है कि जिस तरह से कुख्यात आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएस) के खात्मे के लिए संयुक्त कार्रवाई की थी वैसे ही पाकिस्तान में बसे दाऊद इब्राहिम व उसकी डी-कंपनी, लश्करे-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों पर कार्रवाई होनी चाहिए। भारत ने यह मांग रख कर पाकिस्तान को यह बता दिया है कि जल्द ही जब वह सुरक्षा परिषषद (यूएनएससी) में अस्थाई सदस्य के तौर पर शामिल होगा तो उसकी प्राथमिकताएं क्या होंगी।

संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद और संगठित अपराध विषषय पर जारी चर्चा में भारत ने पाकिस्तान के आतंकी चेहरे को बेनकाब करते हुए इस समस्या से निपटने के पांच रास्ते बताए। भारतीय प्रतिनिधि ने अपने भाषषण में कहा कि, हाल के वषर्षो में आइएस के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई के सकारात्मक परिणाम निकले हैं। इस कामयाबी से पता चलता है कि दुनिया एकसाथ हो तो खूंखार आतंकी संगठनों पर भी लगाम लगाई जा सकती है। इसी तरह की कार्रवाई डी-कंपनी, लश्कर या जैश-ए-मोहम्मद पर हो तो इससे मानवता का भला होगा। भारत ने दूसरी बात यह कही कि जो भी देश अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए करने दे रहा हो उसके खिलाफ पुख्ता कार्रवाई की व्यवस्था हो। इस बारे में यूएनएससी की तरफ से प्रस्ताव भी पारित हो चुका है कि हर देश को अपनी जमीन पर आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए कदम उठाने होंगे।

भारत ने तीसरी और चौथी बात फाइनेंसिएल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) को लेकर कही है कि किस तरह से इसके ढांचे को और मजबूत बनाने की जरूरत है। कहने की जरूरत नहीं कि यहां भी इशारा पाकिस्तान की तरफ था जो आतंकियों को वित्तीय सुविधा पहुंचाने से रोकने में असफल रहा है। एफएटीएफ ने उसे निगरानी सूची में भी रखा हुआ है। एफएटीएफ के अधिकार को ब़़ढाने व उसे कार्रवाई करने की ज्यादा शक्ति देने की बात भी भारत ने की है।

पांचवी बात भारत ने तकनीकी तौर पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग ब़़ढाने को कही है ताकि आतंकियों व उनके संगठनों के बीच बने नेटवर्क को धवस्त किया जा सके। भारत ने आगाह किया है कि आतंकी संगठनों के तकनीकी नेटवर्क को तो़़डना बहुत जरूरी है।

भारत ने दुनिया के सामने आतंकी संगठनों और संगठित अपराध के तालेमल का अपने आपको सबसे ब़़डा भुक्तभोगी बताया है। इस बारे में डी-कंपनी की तरफ से मुंबई हमले का जिक्र किया गया है। भारत ने बताया है कि वषर्ष 1993 में मुंबई हमले में 250 लोगों की जानें गई थीं। लेकिन हमले की साजिश करने वाला दाऊद इब्राहिम आज भी पड़ोसी देश में आराम से है और उसे सारी सुविधाएं मिली हुई हैं। वह दूसरे आतंकी संगठनों के साथ मिल कर वहां हथियारों व मादक द्रव्यों का धंधा चलाता है।

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