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अब ऑनलाइन पढ़ाई के लिए अमेरिका में नहीं मिलेगा प्रवेश, भारत समेत बाकी देशों के हजारों छात्रों पर पड़ेगा असर

वाशिंगटन। भारत समेत दुनिया के तमाम देशों के उन छात्रों के लिए बुरी खबर है जो अमेरिका जाकर ऑनलाइन पढ़ाई करने की इच्छा रखते हैं। अब ऑनलाइन पढ़ाई करने के लिए विदेशी छात्रों को अमेरिका में प्रवेश नहीं मिलेगा। इसके लिए अमेरिकी इमिग्रेशन विभाग ने नियमों में कुछ बदलाव किए हैं, जो सितंबर से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र से ही प्रभावी होगा। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने पहले से पढ़ रहे उन छात्रों को देश से बाहर निकालने की योजना रद कर दी है, जिनकी कक्षाएं कोरोना महामारी के चलते ऑनलाइन कर दी गई है। अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या लगभग दो लाख है। लेकिन, इनमें से कितने छात्रों ने ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में दाखिला ली है, इसकी सही जानकारी नहीं है।

अमेरिका के इमिग्रेशन एंड कस्टम इंफोर्समेंट (ICE) ने नए छात्रों के लिए इस नई नीति का एलान शुक्रवार को किया। हालांकि, नौ मार्च, 2020 को अमेरिकी विश्वविद्यालयों या कॉलेजों में दाखिला लेने वाले विदेशी छात्रों को कुछ रियायत दी गई है। ऐसे छात्र जो दाखिला लेने के बाद अमेरिका से बाहर चले गए उन्हें वीजा जारी किया जाएगा। आव्रजन विभाग के मुताबिक उस समय पूरी तरह से ऑनलाइन कोर्स में प्रवेश लेने वाले छात्रों को भी अमेरिका में रहकर पढ़ाई करने का नियम लागू था।

स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (SEVP) और होमलैंड सुरक्षा विभाग के तहत आने वाले आइसीई ने विश्वविद्यालयों से पूरी तरह से ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले छात्रों को वीजा के लिए आवश्यक दस्तावेज जारी नहीं करने को कहा है। शिक्षा संस्थानों या विश्वविद्यालयों की तरफ से विदेशी छात्रों के लिए फॉर्म आइ-20 जारी किया जाता है, जो उनके गैर आप्रवासी छात्र होने की पात्रता का प्रमाण होता है।

विदेशी छात्रों को दो तरह का वीजा

अमेरिका में पढ़ने आने वाले विदेशी छात्रों दो तरह के वीजा जारी होते हैं। एप-1 और एम-1। शैक्षणिक कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्रों को एफ-1 और प्रौद्योगिकी कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्रों को एम-1 वीजा जारी किया जाता है। लेकिन एसईवीपी और आइसीई की तरह से संयुक्त रूप से जारी दिशानिर्देशों के मुताबिक पूरी तरह से ऑनलाइन कोर्स में दाखिला लेने वाले नए छात्रों को अब एफ-1 या एम-1 वीजा जारी नहीं किया जाएगा। लेकिन जो छात्र नौ मार्च, 2020 या उससे पहले से ही अमेरिका में हैं या 100 फीसद ऑनलाइन कोर्स में दाखिला ले चुके हैं, उन पर यह बदला हुआ नियम नहीं लागू होगा। उनका गैर आप्रवासी यानी नॉनमाइग्रेंट छात्र का दर्जा बना रहेगा।

कई कंपनियों ने किया था विरोध

ट्रंप प्रशासन ने पिछले हफ्ते आश्चर्यजनक तरीके से अपने विवादास्पद योजना को रद करने की घोषणा की थी, जिसमें उन छात्रों को भी अमेरिका से बाहर करने की बात थी, जिनकी पढ़ाई कोरोना के चलते पूरी तरह से ऑनलाइन हो गई है। अमेरिकी इमिग्रेशन विभाग ने छह जुलाई को कहा था कि उन विदेशी छात्रों को देश से बाहर जाना होगा, जिनकी कक्षाएं सितंबर से दिसंबर के सत्र में पूरी तरह से ऑनलाइन चलेंगी। इस नियम का हॉवर्ड, एमआइटी समेत कई शिक्षा संस्थानों और गूगल व फेसबुक जैसी कंपनियों ने विरोध किया था।

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