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सतर्कता बरतकर और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर हम कोरोना संक्रमण से बच सकते हैं

जब से 32 देशों के दो सौ से अधिक वैज्ञानिकों द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ को पत्र लिखकर यह कहा गया कि कोरोना वायरस का संक्रमण हवा द्वारा भी हो सकता है तबसे इस वायरस से उपजी महामारी कोविड-19 को लेकर चिंता कुछ और अधिक बढ़ी है। चूंकि इस महामारी ने पूरी दुनिया में कहर बरपाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है इसलिए इससे जुड़े मसलों पर दुनियाभर में चर्चा हो रही है। सामान्य समझ तो यही कहती है कि इस विषय पर विश्व स्वास्थ्य संगठन और देश के स्वास्थ्य मंत्रालय और विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय पर ही ध्यान दिया जाना चाहिए, लेकिन जब इनसे इतर कोई बात सुनने में बार-बार आए तो सामान्य जन के लिए सही और गलत में फर्क कर पाना थोड़ा मुश्किल होता है।

सोशल मीडिया पर सच और झूठ के बीच के अंतर को समझ पाना कठिन है

जब सोशल मीडिया पर बेतहाशा अधकचरी सूचनाएं परोसी जा रही हों तो आम आदमी के लिए सच और झूठ के बीच के अंतर को समझ पाना कठिन हो जाता है। सोशल मीडिया के प्रभाव के चलते ही कोविड-19 महामारी को लेकर इस तरह की भी चर्चा चल पड़ी है कि कोरोना वायरस की चपेट में देर-सबेर सभी को आना है। हैरानी यह है कि काफी लोगों को यह बात जंच भी रही है। कई बार जब लोगों को कोरोना वायरस से संक्रमण के खतरे के बारे में चेताया जाता है तो उनकी ओर से यह जवाब भी मिलता है कि एक न एक दिन इस वायरस से सभी को संक्रमित होना ही है तो फिर कुछ दिनों के लिए बचने से क्या फायदा?

कोरोना वायरस किसी को भी अपनी चपेट में ले सकती है

कुछ इस मुगालते में हैं कि वे कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं होंगे। इसका कोई आधार नहीं, लेकिन कुछ लोग इसी निराधार सोच से ग्रस्त हैं। जब नेताओं, अभिनेताओं और अन्य तमाम जाने-माने लोगों को यह महामारी अपनी जकड़ में ले रही है तो फिर वह किसी को भी अपनी चपेट में ले सकती है।

लोग फिजिकल डिस्टेंसिंग को लेकर सावधानी नहीं बरत रहे

यह देखने में आ रहा है कि बड़ी संख्या में लोग फिजिकल डिस्टेंसिंग को लेकर सावधानी नहीं बरत रहे। इसी तरह तमाम लोग ऐसे भी हैं जो मास्क नहीं लगा रहे या फिर सही तरह नहीं लगा रहे। यह घातक लापरवाही है-न केवल अपने प्रति, बल्कि दूसरों के प्रति भी। यदि सभी लोग घर से बाहर निकलते ही मास्क का सही तरह प्रयोग करें और फिजिकल डिस्टेंसिंग के साथ अपनी सेहत को लेकर जागरूक रहें तो कोरोना संक्रमण के प्रसार को आसानी से रोका जा सकता है।

कोरोना वायरस से संक्रमित होने से बच सकते हैं, मास्क लगाना और फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन

समझना कठिन है कि आखिर लोग डॉक्टरों की उस सलाह पर ध्यान क्यों नहीं देते जिसके तहत बार-बार यह कहा जा रहा है कि इस वायरस से संक्रमित होने से बचा जा सकता है, बशर्ते इसके लिए शत प्रतिशत प्रयास हों। इन प्रयासों के तहत मास्क के समुचित इस्तेमाल और फिजिकल डिस्टेंसिंग को ही सबसे प्रभावी बताया जा रहा है, लेकिन पता नहीं क्यों लोग उतने सचेत नहीं जितना उन्हें होना चाहिए। यह लापरवाही भारी पड़ रही है-न केवल स्वास्थ्य के मोर्चे पर, बल्कि कारोबार के मोर्चे पर भी। क्षण भर की असावधानी संक्रमित करने के लिए काफी है।

जबूत इरादे की दरकार, कोरोना से आम लोगों को जोखिम लेने की कोई जरूरत नहीं,

नि:संदेह कुछ लोगों के लिए शत-प्रतिशत सावधानी बरतना संभव नहीं। चिकित्सकों, स्वास्थ्य र्किमयों और सुरक्षा र्किमयों को जोखिम उठाना ही पड़ता है। आम लोगों को जोखिम लेने की कोई जरूरत नहीं, फिर भी वे ले रहे हैं और संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। आखिर जब बात जान है तो जहान है तक पहुंच जाए तो फिर शत-प्रतिशत सावधानी का लक्ष्य कौन सी बड़ी चीज है? इसके लिए मजबूत इरादे की दरकार है। जिनके इरादे कमजोर होते हैं वे ही सरल और आसान रास्ता ढूंढने लगते हैं और आलोचना से बचने के लिए अधकचरी बातों से भ्रमित होकर ऐसा कहने लगते हैं कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचना तो मुश्किल है।

अधिकतर संक्रमित व्यक्तियों ने दी कोरोना को शिकस्त

यहां बात उन व्यक्तियों की भी की जानी चाहिए जो किसी कारणवश इस वायरस से संक्रमित हो जा रहे हैं। इस वायरस को आए कई महीने हो गए हैं और कुछ लोगों के अलावा अधिकतर संक्रमित व्यक्तियों ने इसे शिकस्त ही दी है। माना कि हमारे देश में संक्रमित व्यक्तियों का आंकड़ा आठ लाख को पार कर गया है, लेकिन जनसंख्या के अनुपात के हिसाब से यह दुनिया के साधन संपन्न विकसित देशों से पीछे ही है। बताया जा रहा है कि हमारी जलवायु और हम हिंदुस्तानियों की जीवन जीने की जिजीविषा इस वायरस को कड़ी टक्कर दे रही है।

लोगों को सबसे ज्यादा ध्यान अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर देना चाहिए

सच जो भी हो, आम हिंदुस्तानी जिस तरह बचपन से ही कठिन परिस्थितियों से जूझना सीख लेता है वह शायद काम आ रहा है। वैसे तो कोरोना महामारी से लड़ने की दवा की खोज की खबरें भी आने लगी हैं, फिर भी डॉक्टरों द्वारा यही कहा जा रहा है कि हमें सबसे ज्यादा ध्यान सजगता बरतने और अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर देना चाहिए। बढ़ी हुई रोग प्रतिरोधक क्षमता हमारे काम ही आएगी। यह कोई व्यर्थ जाने वाली चीज थोड़े ही है। रोग प्रतिरोधक क्षमता हमें अन्य बीमारियों से भी बचाएगी। ऐसे में भलाई इसी में है कि जब तक ठीक से किसी दवा की खोज नहीं हो जाती है तब तक हम सभी कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने की हर संभव कोशिश करें।

नकारात्मकता, चिंता, डर व्यक्ति को कोरोना वायरस से लड़ने में कमजोर बनाता है

यह समझना भी उचित होगा कि अनावश्यक नकारात्मकता, चिंता, डर इत्यादि व्यक्ति को कोरोना वायरस से लड़ने में कमजोर ही बनाते हैं। लोगों को हर संभव नकारात्मक विचारों और डर नाम की चीज को अपने नजदीक फटकने नहीं देना चाहिए और अपने इर्दगिर्द आशावादी तथा खुशनुमा माहौल बनाए रखने की कोशिश करते रहना चाहिए। फिलहाल कोरोना वायरस से बचने का यही एकमात्र और सरल उपाय है। यदि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोका जा सके तो इसका सबसे अधिक लाभ आम लोगों को ही मिलेगा, क्योंकि कारोबारी गतिविधियां जोर पकड़ेंगी और उससे अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

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